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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 51
श्लोक
2.3.51
জনমে জনমে তুমি সেবিযাছ মোরে
এতেক সকল তত্ত্ব কহিল তোমারে”
जनमे जनमे तुमि सेवियाछ मोरे
एतेक सकल तत्त्व कहिल तोमारे”
अनुवाद
"तुमने जन्म-जन्मांतर तक मेरी सेवा की है। इसलिए मैंने ये सत्य तुम्हें बताए हैं।"
"You have served me for many lifetimes. That is why I have told you these truths."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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