श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.3.5 
দেখিযা প্রভুর প্রেম সর্ব-দাস-গণ
চতুর্-দিকে প্রভু বেডি’ করযে ক্রন্দন
देखिया प्रभुर प्रेम सर्व-दास-गण
चतुर्-दिके प्रभु वेडि’ करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
भगवान का प्रेम देखकर भगवान के चारों ओर खड़े सभी भक्त रो पड़े।
 
Seeing the love of God, all the devotees standing around God started crying.
तात्पर्य
जब सभी भक्तों ने भगवान के प्रेम को देखा तो वे भी उनके प्रेम में डूबकर उनके चारों तरफ नाचने लगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)