श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.3.49 
দৈব-দোষে তাহার হৈল দুষ্ট সঙ্গ
বাণের সṁসর্গে হৈল ভক্ত-দ্রোহে রঙ্গ
दैव-दोषे ताहार हैल दुष्ट सङ्ग
बाणेर सꣳसर्गे हैल भक्त-द्रोहे रङ्ग
 
 
अनुवाद
“दैवयोग से वह बाण की बुरी संगति में पड़ गया और भक्तों पर अत्याचार करने में आनंद लेने लगा।
 
“By chance he fell into the bad company of Bana and started taking pleasure in torturing the devotees.
तात्पर्य
"यद्यपि मेरे निर्देशों से उसका जीवन कुछ समय तक शुद्ध रहा, समय बीतने पर, राजा बाण के बुरे संग ने उसे भक्तों पर अत्याचार करने में रुचि विकसित करा दी।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)