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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 48
श्लोक
2.3.48
মহারাজ হৈলেন আমার নন্দন
দেব-দ্বিজ-গুরু-ভক্ত করেন পালন
महाराज हैलेन आमार नन्दन
देव-द्विज-गुरु-भक्त करेन पालन
अनुवाद
“मेरा पुत्र एक महान राजा बना और उसने देवताओं, द्विजों, गुरुओं और भक्तों का समुचित पालन-पोषण किया।
“My son became a great king and provided proper care to the gods, the twice-born, the gurus and the devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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