श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.3.47 
হৈল ’নরক’-নামে পুত্র মহাবল
আপনে পুত্রেরে ধর্ম কহিল সকল
हैल ’नरक’-नामे पुत्र महाबल
आपने पुत्रेरे धर्म कहिल सकल
 
 
अनुवाद
“मैंने नरका नामक एक शक्तिशाली पुत्र को जन्म दिया, और मैंने स्वयं उसे धार्मिक सिद्धांतों की शिक्षा दी।
 
“I gave birth to a powerful son named Naraka, and I myself taught him the religious principles.
तात्पर्य
"मेरे स्पर्श के परिणामस्वरूप, नारक नामक एक बहुत शक्तिशाली पुत्र का जन्म हुआ। मैंने उसे धार्मिक सिद्धांतों के बारे में बताया।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)