श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.3.46 
যে কালে করিনু মুঞি পৃথিবী-উদ্ধার
হৈল ক্ষিতির গর্ভ পর্শে আমার
ये काले करिनु मुञि पृथिवी-उद्धार
हैल क्षितिर गर्भ पर्शे आमार
 
 
अनुवाद
“जब मैं पृथ्वी को जन्म दे रहा था, तो वह मेरे स्पर्श से गर्भवती हो गई।
 
“When I was giving birth to the Earth, she became pregnant by my touch.
तात्पर्य
"जब मैंने पृथ्वी को उठाया, जो पानी में डूबी हुई थी, वह मेरे स्पर्श से गर्भवती हो गई।" श्रीमद् भागवत पर श्री वैष्णव-तोषणी टीका (10.58.38) में उद्धृत विष्णु पुराण में पृथ्वी के कथन इस प्रकार इस बात की पुष्टि करते हैं:

अर्चितं पुनरित्याह

नारायण जगत्-पते

आत्मानंदेन पूर्णस्य

करवाणि किमल्पकः

"हे भगवान, जब आपने मुझे अपने वराह अवतार में स्थापित किया था, तब मैं आपके स्पर्श के फलस्वरूप एक पुत्र को जन्म दिया था।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)