श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.3.42 
আমি যজ্ঞ-বরাহ—সকল-বেদ-সার
আমি সে করিনু পূর্বে পৃথিবী উদ্ধার
आमि यज्ञ-वराह—सकल-वेद-सार
आमि से करिनु पूर्वे पृथिवी उद्धार
 
 
अनुवाद
"मैं वराह हूँ, समस्त यज्ञों का भोक्ता और वेदों का सार। मैंने ही पहले पृथ्वी का उद्धार किया था।"
 
"I am Varaha, the enjoyer of all sacrifices and the essence of the Vedas. I was the first to liberate the earth."
तात्पर्य
"मैं पूर्व में वैराह रूप में आया था, जो सभी यज्ञों का उपभोक्ता था और मैंने पृथ्वी, जिसमें वैदिक ज्ञान की कमी थी, को भौतिक ज्ञान के जल से मुक्त किया था। इसलिए मैं सभी वेदों का सार हूँ।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)