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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 41
श्लोक
2.3.41
শুনহ মুরারি-গুপ্ত, কহি মত সার
বেদ-গুহ্য কহি এই তোমার গোচর
शुनह मुरारि-गुप्त, कहि मत सार
वेद-गुह्य कहि एइ तोमार गोचर
अनुवाद
हे मुरारीगुप्त! मैं तुम्हें समस्त सिद्धांतों का सार बताता हूँ, सुनो। मैं तुम्हें वेदों का गूढ़ अर्थ बताऊँगा।
Listen, O Murarigupta, I will tell you the essence of all doctrines. I will explain to you the deep meaning of the Vedas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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