श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.3.4 
প্রাণ-হেন সকল সেবক আপনার
’কৃষ্ণ’ বলি’ কান্দে গলা ধরিযা সবার
प्राण-हेन सकल सेवक आपनार
’कृष्ण’ बलि’ कान्दे गला धरिया सबार
 
 
अनुवाद
भगवान के सभी सेवक उनके प्राणों के समान थे। वे उनकी गर्दन पकड़कर रोते थे और कृष्ण का नाम जपते थे।
 
All the devotees of the Lord were like His life. They would cry while holding His neck and chanting the name of Krishna.
तात्पर्य
सर्वोच्च प्रभु और सभी जीवों के जीवन गौरसुंदर, अपने भक्तों को उनके सबसे अंतरंग संबंधी के रूप में मानते थे और कृष्ण से अलग होने के कारण उनकी गर्दन पकड़कर रोते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)