वाखानये वेद, मोर विग्रह ना माने
सर्व अङ्गे हैल कुष्ठ, तबु नाहि जाने
अनुवाद
"वह वेदों की व्याख्या तो करता है, परन्तु मेरे स्वरूप को स्वीकार नहीं करता। उसका पूरा शरीर कोढ़ से पीड़ित है, फिर भी उसे होश नहीं आता।
"He explains the Vedas, but he does not accept my true nature. His entire body is afflicted with leprosy, yet he does not regain consciousness.
तात्पर्य
"हालाँकि प्रकाशानंद उपनिषद और अन्य वैदिक साहित्यों की व्याख्या करते हैं, लेकिन वह भगवान के आध्यात्मिक स्वरूप के शाश्वत अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते हैं। नतीजतन, वह अपराधी बन गया और उसका पूरा शरीर कोढ़ से ग्रस्त हो गया। फिर भी, उसका ज्ञान जागृत नहीं हुआ है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥