“काशी में प्रकाशानन्द नाम का एक दुष्ट है, जो वेदों का उपदेश देते समय मेरे शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देता है।
“There is a wicked man named Prakashananda in Kashi, who tears my body into pieces while I am preaching the Vedas.
तात्पर्य
''प्रकाशानंद नामक एक निष्ठापूर्ण संन्यासी प्रोफेसर ने वेदों के अपने स्पष्टीकरणों में मेरे शाश्वत पारलौकिक अंगों को काट डाला.'' कुछ लोग गलती से मानते हैं कि प्रकाशानंद, प्रबोधानंद के अलावा कोई और नहीं था, जो कावेरी नदी के तट पर रहते थे वेङ्कट भट्ट के छोटे भाई थे। चूँकि ऐसी गलतियाँ भक्तमाल नामक सहजिया पुस्तक में पाई जाती हैं, इसलिए, वही गलती अक्सर आधुनिक लेखकों के बीच भी पाई जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥