গুপ্ত-বাক্যে তুষ্ট হৈলা বরাহ-ঈশ্বর
বেদ-প্রতি ক্রোধ করি’ বলযে উত্তর
गुप्त-वाक्ये तुष्ट हैला वराह-ईश्वर
वेद-प्रति क्रोध करि’ बलये उत्तर
अनुवाद
मुरारी गुप्त की बात सुनकर भगवान वराह प्रसन्न हुए और वेदों पर क्रोध प्रकट करते हुए इस प्रकार बोले।
Hearing the words of Murari Gupta, Lord Varaha became pleased and expressing anger on the Vedas, spoke thus.
तात्पर्य
भौतिक ज्ञान से संपन्न और मोक्ष के इच्छुक व्यक्तियों को धोखा देने के लिए, वेद उनके लिए शब्दों की अज्ञान-रूढ़ि या अज्ञानियों के अनुसार शब्दों के पारंपरिक अर्थ को प्रकट करते हैं। चूंकि भौतिकवादी मायावादी आरोही प्रक्रिया के माध्यम से वेदों का अध्ययन करते हैं और वैदिक साहित्य उन्हें इस तरह से प्रोत्साहित करते हैं, वेदों की विचलित करने वाली शक्ति के प्रति भगवान का क्रोध जीव-दया या जीवित संस्थाओं पर करुणा का एक प्रमुख उदाहरण है। वास्तव में भगवान के लिए वेदों से क्रोधित होने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि वे उनकी सेवा में लगे हुए हैं। इसलिए उनका क्रोध उन व्यक्तियों की अशुभता पर है जो वेदों का निरपेक्ष दृष्टिकोण से अध्ययन करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥