श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.3.34 
তোমার স্তুতিযে মোর কোন্ অধিকার”
এত বলি’ কান্দে গুপ্ত, করে নমস্কার
तोमार स्तुतिये मोर कोन् अधिकार”
एत बलि’ कान्दे गुप्त, करे नमस्कार
 
 
अनुवाद
“आपकी प्रार्थना करने के लिए मुझमें क्या योग्यता है?” ऐसा कहकर मुरारी गुप्त ने रोते हुए भगवान को प्रणाम किया।
 
“What qualifications do I have to pray to you?” Murari Gupta said this and bowed down to the Lord, weeping.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)