श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.3.31 
যত দেখি শুনি প্রভু! অনন্ত ভুবন
তো’র লোম-কূপে গিযা মিলায যখন
यत देखि शुनि प्रभु! अनन्त भुवन
तो’र लोम-कूपे गिया मिलाय यखन
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, जिन असीमित ब्रह्मांडों को हम देखते या सुनते हैं, वे सभी आपके रोम छिद्रों में समाहित हैं।
 
“O Lord, all the infinite universes that we see or hear are contained within Your pores.
तात्पर्य
"ब्रह्मांड असंख्य हैं, या असीमित हैं। ये असंख्य ब्रह्मांड आपकी शारीरिक कोशिकाओं के रोमछिद्रों के भीतर अवस्थित हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)