श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.3.30 
যে বেদের মত করে সকল সṁসার
সেই বেদ সর্ব তত্ত্ব না জানে তোমার
ये वेदेर मत करे सकल सꣳसार
सेइ वेद सर्व तत्त्व ना जाने तोमार
 
 
अनुवाद
“वेद भी, जिनके आदेशों का पालन सभी लोग करते हैं, आपको पूर्ण रूप से जानने में असमर्थ हैं।
 
“Even the Vedas, whose injunctions are followed by all, are unable to know You completely.
तात्पर्य
"वेदों के नियमों का पालन करते हुए संसार के लोग, सुसंस्कृत रूप से साथ-साथ रहते हैं। फिर भी, ये वेद भी संपूर्ण रूप से आपके महिमा का वर्णन करने में असमर्थ है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)