श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.3.25 
স্তব্ধ হৈলা মুরারি অপূর্ব-দরশনে
কি বলিবে মুরারি, না আইসে বদনে
स्तब्ध हैला मुरारि अपूर्व-दरशने
कि बलिबे मुरारि, ना आइसे वदने
 
 
अनुवाद
यह अभूतपूर्व दृश्य देखकर मुरारी स्तब्ध रह गए, उनके पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे।
 
Murari was stunned to see this unprecedented scene, he had no words to speak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)