श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.3.189 
কিবা হয কোটি মণি সে নখে চাহিতে
সে হাস্য দেখিতে কিবা করিব অমৃতে
किबा हय कोटि मणि से नखे चाहिते
से हास्य देखिते किबा करिब अमृते
 
 
अनुवाद
उनके पाँवों के नखों की सुंदरता के आगे करोड़ों रत्नों की सुंदरता क्या है? जब हम उनकी मुस्कान देखते हैं तो अमृत का क्या उपयोग है?
 
What are millions of gems compared to the beauty of His toenails? What is the use of nectar when we see His smile?
तात्पर्य
यदि कोई गौरासुंदर के पैर की उँगलियों को देखता है, तो वह उसमें लाखों रत्नों की सुंदरता देखता है। उनकी मनोरम मुस्कान अमृत को भी कम कर देती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)