श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  2.3.186 
দেখিতে আযত দুই অরুণ নযন
আর কি কমল আছে হেন হয জ্ঞান
देखिते आयत दुइ अरुण नयन
आर कि कमल आछे हेन हय ज्ञान
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति उनके लम्बे कमल-नेत्रों को देखता है, वह सोचता है कि क्या अन्य कमल भी होते हैं।
 
One who sees His long lotus-eyes wonders whether there are other lotuses.
तात्पर्य
गौरसुंदर की लंबी कमल जैसी नेत्रों की खूबसूरती के चरणों में दूसरे कमलों की खूबसूरती धूल के समान हो जाती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)