श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 183
 
 
श्लोक  2.3.183 
কি হয কনক-দ্যুতি সে দেহের আগে
সে বদন দেখিতে চান্দের সাধ লাগে
कि हय कनक-द्युति से देहेर आगे
से वदन देखिते चान्देर साध लागे
 
 
अनुवाद
उनके शरीर की तुलना सोने की चमक से कैसे की जा सकती है? चाँद भी उनका चेहरा देखने की इच्छा रखता है।
 
How can his body be compared to the brilliance of gold? Even the moon desires to see his face.
तात्पर्य
उनके शरीर की अद्भुत तेजस्विता सोने की चमक फीकी कर देती थी। श्री गौरासुंदर इतने बेजोड़ रूपवान थे कि अद्वितीय रूप से सुंदर होने वाला चाँद उनके चेहरे को देखने के लिए आतुर हो जाता था, जिसकी सुंदरता का वर्णन महान कवि किया करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)