श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.3.182 
বিশ্বম্ভর-মূর্তি যেন মদন-সমান
দিব্য গন্ধ মাল্য দিব্য বাস পরিধান
विश्वम्भर-मूर्ति येन मदन-समान
दिव्य गन्ध माल्य दिव्य वास परिधान
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर का रूप कामदेव के समान ही आकर्षक था। वे दिव्य चंदन, पुष्पमालाओं और वस्त्रों से सुशोभित थे।
 
Visvambhara's appearance was as attractive as that of Kamadeva. He was adorned with divine sandalwood paste, garlands of flowers, and clothes.
तात्पर्य
मूल पुरुषोत्तम भगवान श्री महाप्रभु का परम गम्भीर रूप अनेक प्रकार के आभूषणों से सुशोभित था, सुगन्धित पुष्पमालाओं से सुशोभित था, चमकीले वस्त्रों में सजा हुआ था, और लाखों कामदेवों से भी अधिक मोहक था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)