श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.3.181 
সম্মুখে রহিলা মহাপ্রভু বিশ্বম্ভর
চিনিলেন নিত্যানন্দ—প্রাণের ঈশ্বর
सम्मुखे रहिला महाप्रभु विश्वम्भर
चिनिलेन नित्यानन्द—प्राणेर ईश्वर
 
 
अनुवाद
महाप्रभु विश्वम्भर नित्यानंद के ठीक सामने खड़े थे, जिन्होंने तुरन्त अपने जीवन के स्वामी को पहचान लिया।
 
Mahaprabhu Vishvambhara was standing right in front of Nityananda, who instantly recognized the master of his life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)