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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 180
श्लोक
2.3.180
সম্ভ্রমে রহিলা সর্ব-গণ দাণ্ডাইযাকেহ
কিছু না বলেন রহিল চাহিযা
सम्भ्रमे रहिला सर्व-गण दाण्डाइयाकेह
किछु ना बलेन रहिल चाहिया
अनुवाद
तब सभी लोग बिना कुछ बोले, विस्मय और श्रद्धा से उन्हें देखते रहे।
Then everyone kept looking at him with wonder and reverence, without saying anything.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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