कोई भी उनकी आंतरिक मनोदशा को नहीं समझ सकता था। वे ध्यान में मग्न होकर आनंद में डूबे रहते थे और निरंतर मुस्कुराते रहते थे।
No one could understand his inner state. He was immersed in meditation, immersed in bliss, and constantly smiling.
तात्पर्य
जब तक कोई भी नित्यानंद प्रभु को सेवा भावना से नहीं देखेगा उसे उनकी भाव अवस्था कभी समझ नहीं आएगी। बाहरी रूप से वह सदैव मुस्कुराते थे, और अंतराल से वह हमेशा श्री चैतन्य के सेवा सुख में लीन रहते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥