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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 175
श्लोक
2.3.175
উল্লাসে প্রভুর সঙ্গে সর্ব-ভক্ত-গণ
’জয কৃষ্ণ’ বলি’ সবে করিলা গমন
उल्लासे प्रभुर सङ्गे सर्व-भक्त-गण
’जय कृष्ण’ बलि’ सबे करिला गमन
अनुवाद
सभी भक्तजन “जय कृष्ण” का जाप करते हुए प्रसन्नतापूर्वक भगवान के साथ चले।
All the devotees walked happily with the Lord chanting “Jai Krishna”.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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