श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  2.3.173 
সর্বথাশ্রীবাস আদি তাঙ্র তত্ত্ব জানে
না হৈল দেখা কোন কৌতুক-কারণে
सर्वथाश्रीवास आदि ताङ्र तत्त्व जाने
ना हैल देखा कोन कौतुक-कारणे
 
 
अनुवाद
श्रीवास जैसे भक्त नित्यानंद के विषय में सत्य तो जानते हैं, किन्तु किसी विचित्र कारण से वे उन्हें नहीं खोज पाते।
 
Devotees like Srivasa know the truth about Nityananda, but for some strange reason they are unable to find him.
तात्पर्य
भगवान के पूर्णकालिक नित्य-सहचरियों जैसे श्रीवास पंडित द्वारा श्री नित्यानंद प्रभु की व्यर्थ तलाश के खेल में कई रहस्य हैं। बलदेव प्रभु ने स्वयँ को छुपाया और हरिदास और श्रीवास पंडित को अपना रूप नहीं दिखाया। उन्होंने इस तरह से दिखाया कि शाश्वत परम सत्य को बाह्य साधना या पदनाम के माध्यम से नहीं देखा जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)