না বুঝি’ যে নিন্দে’ তান চরিত্র অগাধ
পাইযা ও বিষ্ণু-ভক্তি হয তার বাধ
ना बुझि’ ये निन्दे’ तान चरित्र अगाध
पाइया ओ विष्णु-भक्ति हय तार वाध
अनुवाद
जो व्यक्ति भगवान विष्णु के गुणों की गहराई को समझे बिना उनकी निन्दा करता है, उसकी प्रगति बाधित होती है, भले ही वह भगवान विष्णु की भक्ति प्राप्त कर ले।
One who criticizes Lord Vishnu without understanding the depth of His qualities, his progress is hindered, even if he attains devotion to Lord Vishnu.
तात्पर्य
जो नित्यानंद के लक्षणों में जो समुद्र की गहराई के समान गंभीर हैं अशांति पाते हैं, और इस प्रकार उनके चरण-कमलों में शरण पाने से वंचित हो जाते हैं और गौरा-कृष्ण की उनकी सर्वोच्च सेवा को न समझते हुए उनकी निंदा करते हैं, भले ही वे कृष्ण के संवैधानिक शाश्वत सेवक हैं, वे कृष्ण के सेवकों के रूप में अपने स्थान से गिर जाते हैं और भौतिक प्रकृति पर अधिकार करके खुद को बर्बाद कर लेते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥