श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 169-170
 
 
श्लोक  2.3.169-170 
এই অবতারে কেহ গৌরচন্দ্র গায
নিত্যানন্দ-নাম শুনি’ উঠিযা পলায
পূজযে গোবিন্দ যেন, না মানে শঙ্কর
এই পাপে অনেকে যাইব যম-ঘর
एइ अवतारे केह गौरचन्द्र गाय
नित्यानन्द-नाम शुनि’ उठिया पलाय
पूजये गोविन्द येन, ना माने शङ्कर
एइ पापे अनेके याइब यम-घर
 
 
अनुवाद
कुछ लोग इस अवतार में गौरचन्द्र की महिमा का गान करते हैं और नित्यानंद का नाम सुनते ही भाग जाते हैं। यदि कोई गोविन्द की पूजा करता है, किन्तु भगवान शिव का सम्मान नहीं करता, तो इस पाप के परिणामस्वरूप वह यमराज के धाम को जाता है।
 
Some people sing the glories of Gaurachandra in this incarnation and flee at the mention of Nityananda. If someone worships Govinda but does not respect Lord Shiva, this sin leads to the abode of Yamaraja.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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