श्री रुद्रदेव श्रेष्ठ वैष्णव हैं। वे एक आचार्य और विष्णु की भक्ति सेवा के शिक्षक हैं, इसलिए जो कोई भी उनका अपमान करता है, वह कोई लाभ प्राप्त नहीं करता है। जिस प्रकार विष्णुस्वामी की शिष्य परंपरा महादेव से उत्पन्न हुई है, उसी प्रकार श्री नित्यानंद की कृपा से इस संसार में शुद्ध भक्ति सेवा का प्रचार किया गया है।
आराध्य गोविंदम
तदियन्न नरचयेतु यःन
स भगवतो ज्ञेयः केवलम
दांभिकः स्मृतः
"जो भगवान गोविंद की उपासना करता है पर उनके भक्तों की उपासना करने में विफल रहता है, उसे भगवान का भक्त नहीं बल्कि केवल मिथ्या अभिमान का शिकार समझा जाना चाहिए।"
अविभाजित परम सत्य, व्रजेंद्र-नंदन और उनके भक्त एक हैं, जैसे ऊर्जा और ऊर्जाशील के बीच कोई अंतर नहीं है। जो लोग भगवान विष्णु और वैष्णवों के बीच अंतर करने की कोशिश करते हैं, उनके पास किसी भी तरह का सौभाग्य प्राप्त करने की कोई संभावना नहीं है।
