নিবেদিল আসি’ দোঙ্হে প্রভুর চরণে
“উপাধিক কোথা ও নহিল দরশনে
কি বৈষ্ণব, কি সন্ন্যাসী, কি গৃহস্থ-স্থল
পাষণ্ডীর ঘর-আদি—দেখিলুঙ্ সকল
চাহিলাম সর্ব-নবদ্বীপ যার নাম
সবে না চাহিলুঙ্ প্রভু! গিযা অন্য গ্রাম”
निवेदिल आसि’ दोङ्हे प्रभुर चरणे
“उपाधिक कोथा ओ नहिल दरशने
कि वैष्णव, कि सन्न्यासी, कि गृहस्थ-स्थल
पाषण्डीर घर-आदि—देखिलुङ् सकल
चाहिलाम सर्व-नवद्वीप यार नाम
सबे ना चाहिलुङ् प्रभु! गिया अन्य ग्राम”
अनुवाद
दोनों ने भगवान को बताया, "हमें कोई नया नहीं मिला। हमने वैष्णवों, संन्यासियों और गृहस्थों के घरों की तलाशी ली है; हम नास्तिकों के घर भी गए हैं। हमने पूरे नवद्वीप में खोजबीन की है, लेकिन हम नवद्वीप के बाहर नहीं गए।"
Both of them told the Lord, "We have not found anyone new. We have searched the homes of Vaishnavas, sannyasis, and householders; we have even visited the homes of atheists. We have searched the entire Navadvipa, but we have not gone outside Navadvipa."
तात्पर्य
दोनों प्रभुजी के पास आए और कहने लगे - "नए और लक्षणान्तर से युक्त तो किसी को कुछ भी नहीं पाया। नवद्वीप में हमने नौ घंटे के लिए वैष्णवों , सन्यासियों और गृहस्थों के घर पर जाकर खोज की। वैष्णवों से द्वेष करने वाले नास्तिकों के घर भी गए। नवद्वीप के बाहर ग्रामों को छोड़कर शेष सभी जगह खोजबीन कर ली है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥