श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  2.3.163 
আনন্দে বিহ্বল দুঙ্হে চাহিযা বেডায
তিলার্ধেক উদ্দেশ কোথা ও নাহি পায
आनन्दे विह्वल दुङ्हे चाहिया वेडाय
तिलार्धेक उद्देश कोथा ओ नाहि पाय
 
 
अनुवाद
परमानंद में डूबे दोनों ने चारों ओर देखा, लेकिन उन्हें कोई संकेत नहीं मिल पाया कि वह कहां है।
 
Both of them, immersed in ecstasy, looked around, but they could not find any indication of where he was.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)