श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.3.160 
চল হরিদাস! চল শ্রীবাস পণ্ডিত!
চাহ গিযা দেখি কে আইসে কোন্ ভিত”
चल हरिदास! चल श्रीवास पण्डित!
चाह गिया देखि के आइसे कोन् भित”
 
 
अनुवाद
"हे हरिदास! हे श्रीवास! तुरंत जाओ और देखो कि कौन आया है।"
 
"O Haridasa! O Srivasa! Go immediately and see who has come."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)