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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
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श्लोक 158
श्लोक
2.3.158
“হেন বুঝি, মোর চিত্তে লয এক
কথাকোন মহাপুরুষেক আসিযাছে এথা
“हेन बुझि, मोर चित्ते लय एक
कथाकोन महापुरुषेक आसियाछे एथा
अनुवाद
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि कोई महान व्यक्ति यहां आया है।
It seems to me that a great person has come here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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