श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  2.3.157 
ক্ষণেকে হৈলা প্রভু স্বভাব-চরিত্র
স্বপ্ন-অর্থ সবারে বাখানে রাম-মিত্র
क्षणेके हैला प्रभु स्वभाव-चरित्र
स्वप्न-अर्थ सबारे वाखाने राम-मित्र
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद भगवान अपनी सामान्य अवस्था में आ गए। तब राम के मित्र ने स्वप्न का अर्थ समझाना शुरू किया।
 
After a while, the Lord returned to his normal state. Then Rama's friend began to explain the meaning of the dream.
तात्पर्य
कुछ समय पश्‍चात् जब श्री नारद को चेत हो आया तव उनके सखा बलराम ने स्वप्न का अर्थ बताया। अगर राम-मित्र शब्द से राम के सेवक हनुमान का आशय लिया जाए तो इसका अर्थ है कि मुरारि गुप्‍त ने ही नारायण के स्‍वप्‍न का अर्थ बताया था। स्‍वभाव-चरित्र हैला वाक्‍य से अभिप्राय यह है कि भगवान अपने स्‍वाभाविक अवस्‍था में आ गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)