श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  2.3.155 
মনে মনে চিন্তে সব বৈষ্ণবের গণ
“অবশ্য ইহার কিছু আছযে কারণ”
मने मने चिन्ते सब वैष्णवेर गण
“अवश्य इहार किछु आछये कारण”
 
 
अनुवाद
सभी वैष्णवों ने विचार किया, “इसके पीछे अवश्य ही कोई कारण होगा।”
 
All the Vaishnavas thought, “There must be some reason behind this.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)