श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.3.152 
“মদ আন’ মদ আন’” বলি’ প্রভু ডাকে
হুঙ্কার শুনিতে যেন দুই কর্ণ ফাটে
“मद आन’ मद आन’” बलि’ प्रभु डाके
हुङ्कार शुनिते येन दुइ कर्ण फाटे
 
 
अनुवाद
प्रभु बार-बार पुकार रहे थे, “शराब लाओ! शराब लाओ!” उनकी पुकार इतनी तेज़ थी कि सबके कान के पर्दे लगभग फट गए।
 
The Lord kept calling, "Bring the wine! Bring the wine!" His call was so loud that everyone's eardrums nearly burst.
तात्पर्य
इस प्रकार बताते हुए, भगवान ने 'मदिरा लाओ!' इस तरह से चिल्लाया कि सुनने वालों के कान लगभग फट ही गये।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)