श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.3.151 
কহিতে প্রভুর বাহ্য সব গেল দূর
হলধর-ভাবে প্রভু গর্জযে প্রচুর
कहिते प्रभुर बाह्य सब गेल दूर
हलधर-भावे प्रभु गर्जये प्रचुर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बोलते हुए भगवान अपनी बाह्य चेतना खो बैठे और हलाधर भाव से जोर से गर्जना करने लगे।
 
Speaking thus, the Lord lost his external consciousness and began to roar loudly in the Haladhara mood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)