श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  2.3.147 
মহা অবধূত-বেশ পরম প্রচণ্ড
আর কভু নাহি দেখি এমন উদ্দণ্ড
महा अवधूत-वेश परम प्रचण्ड
आर कभु नाहि देखि एमन उद्दण्ड
 
 
अनुवाद
"वह अवधूत जैसे कपड़े पहने हुए थे और बहुत शक्तिशाली लग रहे थे। मैंने ऐसा व्यक्तित्व पहले कभी नहीं देखा था।"
 
"He was dressed like an Avadhuta and looked very powerful. I had never seen such a personality before."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)