श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  2.3.144 
বেত্র বান্ধা এক কমণ্ডলু বাম হাতে
নীল-বস্ত্র পরিধান, নীল-বস্ত্র মাথে
वेत्र बान्धा एक कमण्डलु वाम हाते
नील-वस्त्र परिधान, नील-वस्त्र माथे
 
 
अनुवाद
"अपने बाएँ हाथ में वे बेंत से लिपटा एक जलपात्र लिए हुए थे। उन्होंने नीले वस्त्र पहने हुए थे और उनके सिर पर नीला कपड़ा सजा हुआ था।"
 
"In his left hand he held a water pot wrapped around a cane. He wore blue robes and a blue cloth adorned his head."
तात्पर्य
"बलदेव की भाँति, उन्होंने ही अपने ऊपर और नीचले अंग पर नीला वस्त्र पहना था। उन्होंने अपने बाएँ हाथ में बेंत से बना एक जलपात्र रखा था।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)