श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.3.140 
দৈবে সেই দিন বিষ্ণু পূজি’ গৌরচন্দ্র
সত্বরে মিলিলা যথা বৈষ্ণবের বৃন্দ
दैवे सेइ दिन विष्णु पूजि’ गौरचन्द्र
सत्वरे मिलिला यथा वैष्णवेर वृन्द
 
 
अनुवाद
भाग्यवश उसी दिन विष्णु की पूजा करने के बाद गौरचन्द्र शीघ्र ही सभी वैष्णवों से मिले।
 
Fortunately, after worshipping Vishnu on the same day, Gaurachandra soon met all the Vaishnavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)