श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.3.138 
পূর্ব-ব্যপদেশে সর্ব-বৈষ্ণবের স্থানে
ব্যঞ্জিযা আছেন, কেহ মর্ম নাহি জানে
पूर्व-व्यपदेशे सर्व-वैष्णवेर स्थाने
व्यञ्जिया आछेन, केह मर्म नाहि जाने
 
 
अनुवाद
किसी बहाने से भगवान ने पहले ही वैष्णवों को नित्यानंद के आगमन के बारे में संकेत दे दिया था, फिर भी उनमें से कोई भी समझ नहीं पाया था।
 
By some pretext the Lord had already given the Vaishnavas a hint about the arrival of Nityananda, yet none of them could understand.
तात्पर्य
नीत्यानंद के आगमन से पहले, गौरसुंदर ने वैष्णवों को संकेत दिया था कि कुछ महान व्यक्तित्व आएगा, लेकिन वैष्णवों को गौरसुंदर के कथन का अर्थ समझ नहीं आया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)