नीत्यानंद के आगमन से पहले, गौरसुंदर ने वैष्णवों को संकेत दिया था कि कुछ महान व्यक्तित्व आएगा, लेकिन वैष्णवों को गौरसुंदर के कथन का अर्थ समझ नहीं आया।