श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.3.137 
নিত্যানন্দ-আগমন জানি’ বিশ্বম্ভর
অনন্ত হরিষ প্রভু হৈলা অন্তর
नित्यानन्द-आगमन जानि’ विश्वम्भर
अनन्त हरिष प्रभु हैला अन्तर
 
 
अनुवाद
जब विश्वम्भर को यह ज्ञात हुआ कि नित्यानंद आ गये हैं, तो वे हृदय में असीम आनन्दित हो गये।
 
When Visvambhara came to know that Nityananda had arrived, he was filled with immense joy in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)