श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.3.136 
নবদ্বীপে নিত্যানন্দ-চন্দ্র-আগমন
ইহা যেই শুনে, তারে মিলে প্রেম-ধন
नवद्वीपे नित्यानन्द-चन्द्र-आगमन
इहा येइ शुने, तारे मिले प्रेम-धन
 
 
अनुवाद
जो कोई भी नवद्वीप में नित्यानंद के आगमन के बारे में सुनेगा, उसे निश्चित रूप से प्रेम की संपत्ति प्राप्त होगी।
 
Whoever hears about Nityananda's arrival in Navadvipa will certainly receive the wealth of love.
तात्पर्य
जो लोग नवद्वीप में भगवान नित्यानंद के शुभ आगमन के विषयों को सुनते हैं वे ईश्वर के प्रेम या कृष्ण-प्रेम के वितरण से परिचित हो जाते हैं और कृष्ण के प्रेम को प्राप्त करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)