श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.3.135 
পাইযা নন্দনাচার্য হরষিত হঞারাখিলেন
নিজ-গৃহে ভিক্ষা করাইযা
पाइया नन्दनाचार्य हरषित हञाराखिलेन
निज-गृहे भिक्षा कराइया
 
 
अनुवाद
नन्दन आचार्य ने नित्यानंद प्रभु का स्वागत किया, उन्हें भोजन कराया और अपने घर में ठहराया।
 
Nandan Acharya welcomed Nityananda Prabhu, fed him and accommodated him in his house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)