श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.3.129 
মুকুতা জিনিযা শ্রী-দশনের জ্যোতিঃআযত
অরুণ দুই লোচন সুভাতি
मुकुता जिनिया श्री-दशनेर ज्योतिःआयत
अरुण दुइ लोचन सुभाति
 
 
अनुवाद
उनके दांतों की चमक मोतियों की चमक को मात देती थी और उनकी दो चौड़ी लाल आंखें उनके चेहरे की सुंदरता को बढ़ा रही थीं।
 
The shine of his teeth surpassed the shine of pearls and his two wide red eyes enhanced the beauty of his face.
तात्पर्य
इस श्लोक से यह संकेत मिलता है कि उनके दांतों का प्रकाश मोतियों की चमक से भी बढ़कर था। उनकी दो चौड़ी और लाल आँखों से उनके चेहरे की सुंदरता बढ़ गई थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)