श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.3.125 
মহা-অবধূত-বেশ প্রকাণ্ড শরীর
নিরবধি গভীরতা দেখি মহাধীর
महा-अवधूत-वेश प्रकाण्ड शरीर
निरवधि गभीरता देखि महाधीर
 
 
अनुवाद
नित्यानंद एक विशाल शरीर वाले महान अवधूत के रूप में प्रकट हुए। वे सदैव गंभीर और अत्यंत संयमित रहते थे।
 
Nityananda appeared as a great avadhuta with a huge body. He was always serious and extremely restrained.
तात्पर्य
केवल वही लोग जो सन्न्यास के जीवन में पूर्णता प्राप्त कर चुके हैं और जो स्वाभाविक रूप से बाहरी त्याग के प्रति उदासीन हो गए हैं, उन्हें अवधूत के रूप में जाना जाता है। अवधूतों की बाहरी संकेतों के प्रति उपेक्षा देखकर बहुत से लोग चकित रह जाते हैं। जब एक सख्त संन्यासी सन्यास के क्रम में पूर्णता प्राप्त कर लेता है, तो वह एक विद्वान संन्यासी या अवधूत के रूप में प्रसिद्ध हो जाता है। श्री नित्यानंद प्रभु ऐसे अवधूतों में सबसे श्रेष्ठ हैं। उनके गुरुत्व और अत्यधिक धैर्य को नंदन आचार्य ने देखा था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)