श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.3.123 
জানিযা আইলা ঝাট নবদ্বীপ-পুরে
আসিযা রহিলা নন্দন-আচার্যের ঘরে
जानिया आइला झाट नवद्वीप-पुरे
आसिया रहिला नन्दन-आचार्येर घरे
 
 
अनुवाद
यह जानकर वे तुरन्त नवद्वीप चले गये, जहाँ वे नन्दन आचार्य के घर ठहरे।
 
Knowing this, he immediately went to Navadvipa, where he stayed at the house of Nandan Acharya.
तात्पर्य
झाटा शब्द का अर्थ है "जल्दी से।" नंदन आचार्य के वर्णन के लिए कोई चैतन्य-चरितामृत (आदि 10.39) या चैतन्य-भागवत, मध्य-खंड, अध्याय सत्रह देख सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)