vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन
»
श्लोक 115
श्लोक
2.3.115
চিনিতে না পারে কেহ অনন্তের ধাম
হুঙ্কার করযে দেখি’ পূর্ব-জন্ম-স্থান
चिनिते ना पारे केह अनन्तेर धाम
हुङ्कार करये देखि’ पूर्व-जन्म-स्थान
अनुवाद
कोई भी अनंत के मूल नित्यानंद को नहीं पहचान सका, क्योंकि वे अपने पूर्व जन्मस्थान को देखकर जोर से गर्जना कर रहे थे।
No one could recognize the original Nityananda of Ananta, as he roared loudly upon seeing his former birthplace.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×