श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.3.1 
জয জয সর্ব-প্রাণ-নাথ বিশ্বম্ভর
জয নিত্যানন্দ-গদাধরের ঈশ্বর
जय जय सर्व-प्राण-नाथ विश्वम्भर
जय नित्यानन्द-गदाधरेर ईश्वर
 
 
अनुवाद
सबके प्रिय भगवान विश्वम्भर की जय हो! नित्यानंद और गदाधर के स्वामी की जय हो!
 
All hail the beloved Lord Visvambhara! All hail the lord of Nityananda and Gadadhara!
तात्पर्य
विश्वम्भर सभी जीवों के सर्वोच्च भगवान है। वे नित्यानंद प्रभु और गदाधर के भी भगवान है। उनकी महिमा सदैव विश्वभर में फैले।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)