श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.28.97 
কি স্ত্রী পুরুষ যে শুনিল নদীযার
সবেই বিষাদ বৈ না ভাবযে আর
कि स्त्री पुरुष ये शुनिल नदीयार
सबेइ विषाद बै ना भावये आर
 
 
अनुवाद
इस तरह नादिया के सभी स्त्री-पुरुष बस विलाप करते रहे। उन्हें और कुछ सूझ ही नहीं रहा था।
 
In this way, all the men and women of Nadia continued to lament. They could not think of anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)