श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.28.85 
প্রভুর অঙ্গনে পডিঽ, কান্দে মুকুন্দ-মুরারি,
শ্রীধর, গদাধর, গঙ্গাদাস
শ্রীবাসের গণ যত, তারা কান্দে অবিরত,
শ্রী-আচার্য কান্দে হরিদাস
प्रभुर अङ्गने पडिऽ, कान्दे मुकुन्द-मुरारि,
श्रीधर, गदाधर, गङ्गादास
श्रीवासेर गण यत, तारा कान्दे अविरत,
श्री-आचार्य कान्दे हरिदास
 
 
अनुवाद
जब भक्तगण भगवान के प्रांगण में भूमि पर गिर पड़े, तो मुकुंद, मुरारी, श्रीधर, गदाधर, गंगादास, श्रीवास और उनका परिवार, चन्द्रशेखर और हरिदास सभी लगातार रो रहे थे।
 
When the devotees fell on the ground in the Lord's courtyard, Mukunda, Murari, Sridhar, Gadadhara, Gangadasa, Srivasa and his family, Chandrashekhar and Haridasa were all crying continuously.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)