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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 8
श्लोक
2.28.8
“শুন শুন নিত্যানন্দ-স্বরূপ গোসাঞি!
এ কথা ভাঙ্গিবে সবে পঞ্চ-জন ঠাঞি
“शुन शुन नित्यानन्द-स्वरूप गोसाञि!
ए कथा भाङ्गिबे सबे पञ्च-जन ठाञि
अनुवाद
"हे नित्यानंद स्वरूप, कृपया सुनिए! मैं जो कहने जा रहा हूँ, वह आपको केवल पाँच लोगों को ही बताना है।"
"O Nityananda Swarupa, please listen! What I am about to say, you must tell it to only five people."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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